बिहार के आईपीएस ऑफिसर्स से जुड़ी तीन बड़ी खबर है। जल्द ही पुलिस महकमे में बड़ा बदलाव होने वाला है।
पहली खबर तीन एसएसपी को प्रमोशन मिलने की है। यानी तीन ऐसे आईपीएस हैं जिन्हें नए साल से पहले एसपी से प्रमोट कर के डीआईजी बनाया जाएगा।
दूसरी खबर चार ऐसे आईपीएस से जुड़ी हुई है इनके खिलाफ लंबित आरोपों के खत्म होने के बाद उनकी पोस्टिंग होगी। यानी चार आईपीएस लंबे समय बाद फिल्ड में दिखेंगे।
जबकि तीसरी खबर ये कि पटना एसएसपी की कुर्सी पर आखिर फैसले में देरी क्यों हो रही है।
पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बिहार के तीन जिलों के एसएसपी और एसपी जल्द ही डीआईजी बनाए जाएंगे। यह तीनों आईपीएस अधिकारी 2011 बैच के हैं। गया के एसएसपी आशीष भारती , मुजफ्फरपुर के एसएसपी राकेश कुमार और बांका के एसपी डॉ सत्य प्रकाश को डीआईजी में प्रोन्नति दी जाएगी। मुख्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 2011 बैच के इन तीनों आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी बनाया जाना है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन जल्द ही आ सकता है
बिहार कैडर के चार ऐसे आईपीएस अधिकारी है जो लंबे समय से फील्ड से लापता हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि चारों आईपीएस अधिकारियों पर कई आरोप लगे थे। इन आरोपों के चलते इन्हें पोस्टिंग नहीं मिली थी। अब यह चारों आईपीएस अधिकारी आरोपमुक्त हो चुके हैं। लिहाजा सरकार इन्हें जल्द ही पोस्टिंग देने वाली है। इन अधिकारियों में 2007 बैच के आईपीएस विवेक कुमार, 2006 बैच की आईपीएस अनुसुइया रणसिंह साहू, 2009 बैच के आईपीएस पुष्कर आनंद और 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी सुधीर कुमार पोरिका शामिल हैं।
IPS Vivek Kumar : आय से अधिक संपत्ति के मामले में आवास पर हुई थी छापेमारी
सीनियर आईपीएस अधिकारी विवेक कुमार को भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी राहत मिली। मामला 2018 का है। तब विवेक कुमार मुजफ्फरपुर के एसएसपी थे। उस समय आय से अधिक संपत्ति के आरोप में उनके सरकारी आवास पर निगरानी की छापेमारी हुई थी। इस मामले में निगरानी थाना में कांड भी दर्ज किया गया था। सरकार इस केस को वापस लेने का फैसला ले चुकी है।
IPS Anusuya Ransingh Sahu : सामग्रियों के खरीद में वित्तीय अनियमितता के आरोप
सीनियर आईपीएस अनुसुइया रणसिंह साहू के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी गई। यह मामला उस वक्त का है जब वह एमपीटीसी डुमराव में समादेष्टा थीं। उनके विरुद्ध सामग्रियों के खरीद में वित्तीय अनियमितता एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप था। बीते वर्ष मुख्य जांच आयुक्त ने साहू के विरुद्ध गठित आरोप के प्रमाणित ना होने का मंतव्य दिया था। इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा भी परामर्श दिया गया कि साहू के विरुद्ध कोई भी आरोप सिद्ध नहीं होता है। अतः उन्हें दोष मुक्त घोषित कर दिया जाए।
IPS Pushkar Anand : शादी का प्रलोभन देकर रेप का आरोप
2014 में कैमूर के तत्कालीन एसपी पुष्कर आनंद के खिलाफ वहां की तत्कालीन एसडीपीओ ने महिला थाने में कांड संख्या 47/2014 दर्ज कर आरोप लगाया था कि जब उनकी पदस्थापना कैमूर में थी तो एसपी के साथ उनकी नजदीकियां हो गई थीं। नजदीकियां बढ़ने के बाद बात शादी तक पहुंच गयी थी। शादी के लिए जन्मपत्री मिलान के लिए उनसे जन्म तिथि और समय मांगा गया। बाद में बताया गया कि जन्मपत्री का मिलान नहीं हो सका है। ऐसे में शादी संभव नहीं है। इस बीच दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गए थे। एसडीपीओ का आरोप था कि शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ बलात्कार किया गया। प्राथमिकी पर कैमूर के एसडीजेएम ने 1 अप्रैल 2019 को रेप सहित कई अन्य धाराओं में संज्ञान लिया। इस आदेश को एसपी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा गया कि जब एसपी ने सूचक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए पत्र एडीजी, मुख्यालय को भेजा तो सूचक एसडीपीओ ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी। इस मामले में पटना हाई कोर्ट से आईपीएस पुष्कर आनंद को बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने पुष्कर आनंद के खिलाफ रेप और अन्य धाराओं में लिए गए संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया। जस्टिस प्रभात कुमार सिंह ने एसपी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद संज्ञान आदेश को निरस्त किया था।
IPS Sudhir Kumar Porika : अवैध खनन में EOU की रिपोर्ट पर हुए निलंबित
बालू के अवैध खनन-परिवहन में आईपीएस अधिकारी और औरंगाबाद के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार पोरिका को लिप्त पाया गया था। आर्थिक अपराध इकाई की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने औरंगाबाद के एसपी 2010 बैच के आईपीएस पोरिका को 27 जुलाई 2021 के प्रभाव से निलंबित कर दिया था। यूपीएससी ने 9 अगस्त 2024 के माध्यम से अपना मंतव्य दिया। इसमें सुधीर कुमार पोरिका के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। साथ ही, इन्हें दोष मुक्त घोषित करने की सिफारिश की. संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श के बाद औरंगाबाद के तत्कालीन एसपी सुधीर कुमार पोरिका के खिलाफ संचालित विभागीय कार्रवाई को दोष मुक्त करते हुए समाप्त कर दिया गया।
Patna SSP : 3 आईपीएस में कुर्सी के लिए जंग, नोटिफिकेशन कब ?
पटना के सीनियर एसपी राजीव मिश्रा डीआईजी बन चुके हैं। 31 दिसंबर तक उन्हें किसी रेंज का डीआईजी बना दिया जाएगा। इस बीच पटना एसएसपी की कुर्सी के लिए जंग तेज हो गई है। पटना एसएसपी की रेस में सारण एसएसपी डॉ कुमार आशीष, सीआईडी के एसपी अवकाश कुमार और भागलपुर के एसएसपी आनंद कुमार का नाम शामिल है। पटना एसएसपी की कुर्सी 2012 बैच के किसी आईपीएस को मिलनी है। यह तीनों ही अधिकारी 2012 बैच के हैं। मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पटना एसएसपी के नाम पर जल्द ही फैसला होना है। लेकिन तीन आईपीएस को प्रमोशन और चार आईपीएस को पोस्टिंग भी होनी है। यही वजह है कि पटना एसएसपी की अधिसूचना में देरी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि पटना एसएसपी, तीन आईपीएस को प्रमोशन और चार आईपीएस की पोस्टिंग की अधिसूचना एक साथ जारी की जाएगी। ऐसे में दिसंबर में नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

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